श्रावण मास 2014

sivpyja

  • श्रावण मास में सोमवार के दिनों में भगवान शिवजी का व्रत करना चाहिए और व्रत करने के बाद भगवान श्री गणेश जी, भगवान शिवजी, माता पार्वती व नन्दी देव की पूजा करनी चाहिए
  • पूजन सामग्री में जल, दुध, दही, चीनी, घी, शहद, पंचामृ्त,मोली, वस्त्र, जनेऊ, चन्दन, रोली, चावल, फूल, बेल-पत्र, भांग, आक-धतूरा, कमल,गट्ठा, प्रसाद, पान-सुपारी, लौंग, इलायची, मेवा, दक्षिणा चढाया जाता है.
  • इस दिन धूप दीया जलाकर कपूर से आरती करनी चाहिए. पूजा करने के बाद एक बार भोजन करना चाहिए. और श्रावण मास में इस माह की विशेषता का श्रवण करना चाहिए. 

 

श्रावण मास शिव उपासना महत्व |

  • भगवान शिव को श्रावण मास सबसे अधिक प्रिय है
  • इस माह में प्रत्येक सोमवार के दिन भगवान श्री शिव की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है.
  • इस मास में भक्त भगवान शंकर का पूजन व अभिषेक करते है.
  • सभी देवों में भगवान शंकर के विषय में यह मान्यता प्रसिद्ध है, कि भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते है.
  • एक छोटे से बिल्वपत्र को चढाने मात्र से तीन जन्मों के पाप नष्ट होते है. 
  • श्रावण मास के विषय में प्रसिद्ध एक पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावण मास के सोमवार व्रत, एक प्रदोष व्रत तथा और शिवरात्री का व्रत जो व्यक्ति करता है, उसकी कोई कामना अधूरी नहीं रहती है. 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के समान यह व्रत फल देता है.   
  • इस व्रत का पालन कई उद्देश्यों से किया जा सकता है. महिलाएं श्रावण के 16 सोमवार के व्रत अपने वैवाहिक जीवन की लम्बी आयु और संतान की सुख-समृ्द्धि के लिये करती है,
  • यह अविवाहित कन्याएं इस व्रत को पूर्ण श्रद्वा से कर मनोवांछित वर की प्राप्ति करती है.
  • सावन के 16 सोमवार के व्रत कुल वृद्धि, लक्ष्मी प्राप्ति और सुख -सम्मान के लिये किया जाता है.  

  
शिव पूजन

  • भगवान अपने भक्त की कामना बिना कहे ही प ूरी करते है.
  • बिल्व पत्र के बारे में यह मान्यता प्रसिद्ध है, कि बेल के पेड को जो भक्त पानी या गंगाजल से सींचता है, उसे समस्त तीर्थों की प्राप्ति होती है.
  • वह भक्त इस लोक में सुख भोगकर, शिवलोक में प्रस्थान करता है.
  • बिल्व पत्थर की जड में भगवान शिव का वास माना गया है यह पूजन व्यक्ति को सभी तीर्थों में स्नान करने का फल देता है.  

 
सावन माह व्रत विधि |

  • जिस व्यक्ति को यह व्रत करना हो, व्रत के दिन प्रात:काल में शीघ्र सूर्योदय से पहले उठना चाहिए.
  • श्रावण मास में केवल भगवान श्री शंकर की ही पूजा नहीं की जाती है,
  • बल्कि भगवान शिव की परिवार सहित पूजा करनी चाहिए.
  • सावन सोमवार व्रत सूर्योदय से शुरु होकर सूर्यास्त तक किया जाता है. व्रत के दिन सोमवार व्रत कथा सुननी चाहिए. तथा व्रत करने वाले व्यक्ति को दिन में सूर्यास्त के बाद एक बार भोजन करना चाहिए. 
  • प्रात:काल में उठने के बाद स्नान और नित्यक्रियाओं से निवृ्त होना चाहिए. इसके बाद सारे घर की सफाई कर, पूरे घर में गंगा जल या शुद्ध जल छिडकर, घर को शुद्ध करना चाहिए.
  • इसके बाद घर के ईशान कोण दिशा में भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करना चाहिए.
  • मूर्ति स्थापना के बाद सावन मास व्रत संकल्प लेना चाहिए.   

 

कांवड मेले |

    • श्रावन मास के पहले दिन से ही हरिद्वार में शिव की पौडी पर भक्तों की तादाद बढने लगती है.
    • सुबह सूर्योदय से पहले ही श्रद्वालु गंगा स्नान के लिये यहां के विभिन्न घाटों पर पहुंचने लगते है. और जल लेकर अपने स्थानों की ओर बढने लगते है.


    May God Bless You

    Blog by: Mr. Jayesh Dave
    Date Write: 24 -7-2014