Speciality of Nag Panchmi 2015

नाग पंचमी की विशेषता - Speciality of Nag Panchmi by Astro Macho

नाग पंचमी श्रवण मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जायेगा, इस वर्ष यह पर्व 14 अगस्त, शनिवार, हस्त नक्षत्र में रहेगा. यह श्रद्धा व विश्वास का पर्व है. नागों को धारण करने वाले भगवान भोलेनाथ की पूजा आराधना करना भी इस दिन विशेष रुप से शुभ माना जाता है.

नाग पंचमी की विशेषता - Speciality of Nag Panchmi

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता है. पूर्ण श्रवण मास में नाग पंचमी होने के कारण इस मास में धरती खोदने का कार्य नहीं किया जाता है. इसलिये इस दिन भूमि में हल चलाना, नींव खोदना शुभ नहीं माना जाता है. भूमि में नाग देवता का घर होना है. भूमि के खोदने से नागों को कष्ट होने की की संभावनाएं बनती है.

नाग पंचमी के उपवास की विधि - Nag Panchmi Upvas Vidhi

देश के कई स्थानों पर नाग पंचमी कृ्ष्ण पक्ष की पंचमी भी मनाई जाती है. नाग पंचमी में नाग देवताओं के लिये व्रत रखा जाता है. इस व्रत में पूरे दिन उपवास रख कर सूर्य अस्त होने के बाद नाग देवता की पूजा के लिये खीर के रुप में प्रसाद बनाया जाता है उस खीर को सबसे पहले नाग देवता की मूर्ति अथवा शिव मंदिर में जाकर भोग लगाया जाता है, उसके बाद इस खीर को प्रसाद के रुप में स्वयं ग्रहण किया जाता है. उपवास समाप्ति के भोजन में नमक व तले हुए भोजन का प्रयोग करना वर्जित होता है. इस दिन उपवास से संबन्धित सभी नियमों का पालन करना चाहिए.

दक्षिण भारत में नाग पंचमी का अलग रुप - Nag Panchmi in South India

भारत के दक्षिण क्षेत्रों में श्रवण, शुक्ल पक्ष की नाग पंचमी में शुद्ध तेल से स्नान किया जाता है. तथा वहां अविवाहित कन्याएं उपवास रख, मनोवांछित जीवन साथी की प्राप्ति की कामना करती है. नाग पंचमी में बासी भोजन ग्रहण करने का विधान नाग पंचमी के दिन मात्र पूजा में प्रयोग होने वाला भोजन ही तैयार किया जाता है. बाकि भोजन एक दिन पहले ही बनाया जाता है. परिवार के जो सदस्य उपवास नहीं रखते है. उन्हें बासी भोजन ही ग्रहण करने के लिये दिया जाता है. खीर के अलावा चावल-सैवई ताजे भोजन में बनाये जाते है.

मुख्य द्वार पर नाग देवता की आकृ्ति पूजा - Nag Devda Puja on Nag Panchami

देश के कुछ भागों में 14 अगस्त नाग पंचमी के दिन उपवासक अपने घर की दहलीज के दोनों ओर गोबर से पांच सिर वाले नाग की आकृ्ति बनाते है. गोबर न मिलने पर गेरू का प्रयोग भी किया जा सकता है. इसके बाद नाग देवता को दूध, दुर्वा, कुशा, गन्ध, फूल, अक्षत, लड्डूओं सहित पूजा करके नाग स्त्रोत या निम्न मंत्र का जाप किया जाता है. " ऊँ कुरुकुल्ये हुँ फट स्वाहा" इस मंत्र की तीन माला जाप करने से नाग देवता प्रसन्न होते है. नाग देवता को चंदन की सुगंध विशेष प्रिय होती है. इसलिये पूजा में चंदन का प्रयोग करना चाहिए. इस दिन की पूजा में सफेद कमल का प्रयोग किया जाता है. उपरोक्त मंत्र का जाप करने से "कालसर्प योग' दोष की शान्ति भी होती है.

मनसा देवी को प्रसन्न करना - Pooja of Godess Mansa Devi

उतरी भारत में श्रवण मास की नाग पंचमी के दिन मनसा देवी की पूजा करने का विधान भी है. देवी मनसा को नागों की देवी माना गया है. इसलिये बंगाल, उडिसा और अन्य क्षेत्रों में मनसा देवी के दर्शन व उपासना का कार्य किया जाता है.

काल-सर्प योग की शान्ति - Kal Sarp Dosha Shanti Remedies

14 अगस्त 2010, शुक्ल पक्ष, श्रवण मास के दिन जिन व्यक्तियों की कुण्डली में "कालसर्प योग' बन रहा हों, उन्हें इस दोष की शान्ति के लिये उपरोक्त बताई गई विधि से उपवास व पूजा-उपासना करना, लाभकारी रहता है. काल सर्प योग से पीडिय व्यक्तियों को इस दिन नाग देवता की पूजा अवश्य करनी चाहिए.

नाग-पंचमी में क्या न करें - What you should not do

नाग देवता की पूजा उपासना के दिन नागों को दूध पिलाने का कार्य नहीं करना चाहिए. उपासक चाहें तो शिव लिंग को दूध स्नान करा सकते है. यह जानते हुए कि दूध पिलाना नागों की मृ्त्यु का कारण बनता है. ऎसे में उन्हें दूध मिलाना अपने हाथों से अपने देवता की जान लेने के समान होता है. इसलिये भूलकर भी ऎसी गलती करने से बचना चाहिए. इससे श्रद्धा व विश्वास के पर्व में जीव हत्या करने से बचा जा सकता है. " ऊँ कुरुकुल्ये हुँ फट स्वाहा" इस मंत्र की तीन माला जाप करने से नाग देवता प्रसन्न होते है. नाग देवता को चंदन की सुगंध विशेष प्रिय होती है. इसलिये पूजा में चंदन का प्रयोग करना चाहिए. इस दिन की पूजा में सफेद कमल का प्रयोग किया जाता है. उपरोक्त मंत्र का जाप करने से "कालसर्प योग' दोष की शान्ति भी होती है.


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Blog by: Mr. Jayesh Dave
Date Write: 24 August, 2013