Navratri 2014



आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा, 25 सितंबर 2014 को शारदीय नवरात्रों का प्रारंभ होगा. नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है नौ रातें। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवा दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है।

 

नवरात्रि में हम जितनी पवित्रता बरतते हैं देवी उतनी ही प्रसन्न होती हैं। कई घरों में बड़े ही नियम से पूजा-पाठ होता है। कुछ लोग बहुत कठोर नियम करते हैं। इन परंपराओं में ही तो हमारे संस्कार बसे हैं।

 

स्त्री हो या पुरुष, सबको नवरात्र करना चाहिये । यदि कारणवश स्वयं न कर सकें तो प्रतिनिधि ( पति – पत्नी, ज्येष्ठ पुत्र, सहोदर या ब्राह्मण ) द्वारा करायें ।  नवरात्र नौ रात्रि पूर्ण होनेसे पूर्ण होता है । इसलिये यदि इतना समय न मिले या सामर्थ्य न हो तो सात, पाँच, तीन या एक दिन व्रत करे और व्रतमें भी उपवास, अयाचित, नक्त या एकभुक्त – जो बन सके यथासामर्थ्य वही कर ले ।

 

 हिंदुओं के इस पवित्र त्यौहार में एक तरफ भक्तजन मां अंबे के चरणों में श्रद्धा प्रकट करते हुए नौ दिनों तक उपवास रखते हैं  व्रत में हमेशा घर की बनी चीजों को ही खाएं। बाहर की तली भूनी चीजों या व्रत वाली स्पेशल थाली से परहेज करें तो ही अच्छा रहेगा आपके लिए।

 

- दूध का सेवन व्रत में जरूर करें। दूध से बनी चीजें पनीर, दही आदि ज्यादा-से-ज्यादा खाएं।

- सेब, अनार, संतरा, केला आदि फलों को आहार में शामिल करें।

 

- एक साथ ढेर सारा पानी पीने के बजाय, थोड़े-थोड़े अंतराल पर ही पानी पिएं।

- व्रत में सिंघाड़ा और उसके आटे से बनी चीजों को खाएं। पूरी ऊर्जा मिलेगी।

- संभव हो तो घर में ही निकाले हुए जूस पिएं। जूस से आप पूरे दिन तरोताजा महसूस करेंगी।

- रात में बादाम और किशमिश को भिगो दें और फिर दिन में इनका सेवन करें। इनके सेवन से शरीर को मिनरल्स की प्राप्ति होती हैं।

- व्रत में अपच और कब्ज की भी शिकायत हो सकती हैं। इस दौरान फाइबर फूड्स का इस्तेमाल करना भी लाभकारी होता है। फाइबर फूड्स का
- मतलब खीरा, चीकू, संतरा, छाछ और रेशेदार फलों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

- नारियल पानी का सेवन भी आप व्रत के दौरान कर सकती हैं।


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नौ देवियाँ

श्री शैलपुत्री -इसका अर्थ-पहाड़ों की पुत्री होता है।
श्री ब्रह्मचारिणी -इसका अर्थ-ब्रह्मचारीणी।
श्री चंद्रघरा -इसका अर्थ-चाँद की तरह चमकने वाली।
श्री कूष्माडा -इसका अर्थ-पूरा जगत उनके पैर में है।
श्री स्कंदमाता -इसका अर्थ-कार्तिक स्वामी की माता।
श्री कात्यायनी -इसका अर्थ-कात्यायन आश्रम में जन्मि।
श्री कालरात्रि -इसका अर्थ-काल का नाश करने वली।
श्री महागौरी -इसका अर्थ-सफेद रंग वाली मां।
श्री सिद्धिदात्री -इसका अर्थ-सर्व सिद्धि देने वाली।
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देवी पूजा की संक्षिप्त विधि

 

पहले आसन पर बैठकर जल से तीन बार शुद्ध जल से आचमन करे-


ॐ केशवाय नम:,
ॐ माधवाय नम:,
ॐ नारायणाय नम:

     फिर हाथ में जल लेकर हाथ धो लें। हाथ में चावल एवं फूल लेकर अंजुरि बांध कर जगदम्बे दुर्गा देवी का ध्यान करें।

'श्री जगदम्बे दुर्गा देव्यै नम:।' दुर्गादेवी-आवाहयामि! - फूल, चावल चढ़ाएं।
'श्री जगदम्बे दुर्गा देव्यै नम:' आसनार्थे पुष्पानी समर्पयामि।- भगवती को आसन दें।
श्री दुर्गादेव्यै नम: पाद्यम, अर्ध्य, आचमन, स्नानार्थ जलं समर्पयामि। - आचमन ग्रहण करें।
श्री दुर्गा देवी दुग्धं समर्पयामि - दूध चढ़ाएं।
श्री दुर्गा देवी दही समर्पयामि - दही चढा़एं।
श्री दुर्गा देवी घृत समर्पयामि - घी चढ़ाएं।
श्री दुर्गा देवी मधु समर्पयामि - शहद चढा़एं
श्री दुर्गा देवी शर्करा समर्पयामि - शक्कर चढा़एं।
श्री दुर्गा देवी पंचामृत समर्पयामि - पंचामृत चढ़ाएं।
श्री दुर्गा देवी गंधोदक समर्पयामि - गंध चढाएं।
श्री दुर्गा देवी शुद्धोदक स्नानम समर्पयामि - जल चढा़एं।
आचमन के लिए जल लें,
श्री दुर्गा देवी वस्त्रम समर्पयामि - वस्त्र, उपवस्त्र चढ़ाएं।
श्री दुर्गा देवी सौभाग्य सूत्रम् समर्पयामि-सौभाग्य-सूत्र चढाएं।
श्री दुर्गा-देव्यै पुष्पमालाम समर्पयामि-फूल, फूलमाला, बिल्व पत्र, दुर्वा चढ़ाएं।
श्री दुर्गा-देव्यै नैवेद्यम निवेदयामि-इसके बाद हाथ धोकर भगवती को भोग लगाएं।
श्री दुर्गा देव्यै फलम समर्पयामि- फल चढ़ाएं।
तांबुल (सुपारी, लौंग, इलायची) चढ़ाएं- श्री दुर्गा-देव्यै ताम्बूलं समर्पयामि।
मां दुर्गा देवी की आरती करें।

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श्री अम्बें जी की आरती

 

सर्वमंगल मांग्लयै , शिवे सर्वार्थसाधिके |
शरण्ये त्र्यम्िके गौरी , नारायणी नमोऽस्तुते ॥

जय अम्बे गौरी , मैया जय श्यामा गौरी |
तुमको निसदिन ध्यावत , हरि ब्रम्हा शिवरी ॥
जय अम्बे गौरी.....


मांग सिंदुर विराजत , टीको मृगमद को |
उज्जवल से दोऊ नैना , चन्द्रवदन नीको ॥
जय अम्बे गौरी.....


कनक समान कलेवर , रक्ताम्बर राजे |
रक्त पुष्प गल माला , कण्ठन पर साजे ॥
जय अम्बे गौरी....


केहरि वाहन राजत , खडग खप्पर धारी |
सुर नर मुनि जन सेवत , तिनके दुःख हारी ॥
जय अम्बे गौरी.....


कानन कुंडल शोभित , नासाग्रे मोती |
कोटिक चंद्र दिवाकर , राजत सम ज्योति ॥
जय अम्बे गौरी.....


शुंभ निशंभु बिदारे , महिषासुर धाती |
धूम्र विलोचन नैना , निशदिन मदमाती ॥
जय अम्बे गौरी.....


चंड मुंड संहारे , शोणित बीज हरे |
मधु कैटभ दोउ मारे , सुर भयहीन करे ॥
जय अम्बे गौरी.....


ब्रम्हाणी रुद्राणी , तुम कमलारानी |
आगम निगम बखानी , तुम शिव पटरानी ॥
जय अम्बे गौरी.....


चौसंठ योगिनी गावत , नृत्य करत भैरुँ |
बाजत ताल मृदंगा , अरु डमरुँ ॥
जय अम्बे गौरी.....


तुम ही जग की माता , तुम ही हो भरता |
भक्तन की दुःखहर्ता , सुख सम्पत्ति कर्ता ॥
जय अम्बे गौरी.....


भुजा अष्ट अति शोभित , वर मुद्रा धारी |
मनवांच्छित फल पावे सेवत नर नारी ॥
जय अम्बे गौरी.....


कंचन थाल विराजत अगर कपुर बात्ती |
श्री माल केतु में राजत कोटि रतन ज्योती ॥
जय अम्बे गौरी.....


या अम्बे जी की आरती जो कोई नर गाये |
कहत शिवानंद स्वामी , सुख संपत्ति पाये ॥
जय अम्बे गौरी.....


जय अम्बे गौरी , मैया जय श्यामा गौरी |
तुमको निसदिन ध्यावत , हरि ब्रम्हा शिवरी ॥


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मंत्रों को विशेष महत्व

 

हिन्दू वैदिक शास्त्रों और पुराणों में मंत्रों को विशेष महत्व दिया गया है। मंत्रों का उपयोग देवी-देवताओं की पूजा- अर्चना तथा प्रार्थना आदि के लिए किया जाता है।

 

विपत्ति-नाश के लिए :

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्पापहरे देव‍ि नारायणि नमोस्तुते।।

 

महामारी नाश के लिए मां दुर्गा की आराधना इस मंत्र के द्वारा करना चाहिए-


जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी |
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते ||

 

भय नाश के लिए :

सर्वस्वरूपे सर्वेश सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि, दुर्गे देवि नमोस्तुते।।

रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र |
दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम् ||

 

पाप नाश तथा भक्ति की प्राप्ति के लिए :

नमेभ्य: सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।

 

दरिद्रता दूर हो जाती है ।


"ॐ श्रीं ह्रीं क्लिं ऐं कमल वसिन्ये स्वाहा"

 

मोक्ष की प्राप्ति के लिए :

त्वं वैष्णवी शक्तिरन्तवीर्या।
विश्वस्य बीजं परमासि माया।
सम्मोहितं देवि समस्तमेतत्
त्वं वै प्रसन्ना भूवि मुक्ति हेतु:।।

 

हर प्रकार के ‍कल्याण के लिए :

सर्वमंगल्यमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते।।

 

धन, पुत्रादि प्राप्ति के लिए :

सर्वबाधाविनिर्मुक्तो-धनधान्यसुतान्वित:
मनुष्यों मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।

 

विश्वव्यापी विपत्तियों के नाश के लिए मां :

दुर्गा की वंदना इस मंत्र के द्वारा करना चाहिए-
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य |
प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य ||

 

नोट: यदि ये पोस्ट या फोटो से किसीको भी कोई भी प्रकार की समस्या हो तो कृपया क्षमा प्रदान करे क्युकी ये सभी पोस्ट विज़िटर के जानकारी एवं एंटरटेंटमेंट के लिए हे। धन्यवाद।

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